सौरमंडल की उत्पत्ति - Notes
नोट- प्रतियोगी परीक्षाओं में अब तक पूछे गये प्रश्नों को बुलेट चिन्ह (•) से अंकित किया गया है।
सौरमण्डल की उत्पत्ति से संबंधित सिद्धांतों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है- A. अद्वैतवादी संकल्पना B. द्वैतवादी संकल्पना C. आधुनिक सिद्धांत
A. अद्वैतवादी / एक तारक / पैतृक संकल्पना (18वीं शताब्दी)
इस संकल्पना के अनुसार सौरमंडल की उत्पत्ति एक ही तारे (सूर्य) से हुई है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित परिकल्पनाएं दी गयीं-
1. बफन की पुच्छलतारा / धूमकेतु परिकल्पना (Comet Hypothesis) - 1749
कॉम्टे द बफन के अनुसार एक विशाल पुच्छलतारा (धूमकेतु) सूर्य से टकराया। इस टक्कर से सूर्य का कुछ मलबा (Debris) बाहर निकल गया। इसी मलबे से ग्रहों का निर्माण हुआ।
महत्व: यह पहला वैज्ञानिक प्रयास था, लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया गया।
2. •कांट की वायव्य राशि / गैसीय परिकल्पना (Gaseous Hypothesis) - 1755
•जर्मनी के दार्शनिक इमैनुएल कांट ने न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत को अपनी परिकल्पना का आधार बनाया। कांट को ही निहारिकीय संकल्पना का वास्तविक प्रतिपादक माना जाता है। इनकी गैसीय परिकल्पना के प्रमुख बिन्दु-
•ब्रह्मांड में शीतल एवं गतिहीन दैव निर्मित कण थे।
•गुरुत्वाकर्षण के कारण इन कणों में आपस में टकराव हुआ।
•टकराव से उत्पन्न ऊष्मा एवं ताप बढ़ने से एक निहारिका (Nebula) का निर्माण हुआ।
ताप बढ़ने से निहारिका की घूर्णन गति में वृद्धि हुई।
•अत्यधिक घूर्णन गति के कारण अपकेन्द्रीय बल (Centrifugal Force) के प्रभाव से निहारिका में से एक-एक करके 9 छल्ले अलग हुए।
इन्हीं 9 छल्लों से 9 ग्रहों का निर्माण हुआ।
कमियाँ: •कांट ने गणितीय नियमों (कोणीय संवेग) का गलत प्रयोग किया। कणों के आपसी टकराव से स्वतः गति उत्पन्न नहीं हो सकती।
•कांट का कथन- मुझे
पदार्थ दो और मैं इससे पूरी दुनिया का निर्माण कर दूंगा
3. •लाप्लास की निहारिका परिकल्पना (Nebular Hypothesis) - 1796
लाप्लास ने कांट के सिद्धांत को गणितीय रूप से संशोधित किया-
ब्रह्मांड में तप्त, गतिशील एवं मंद घूर्णन वाला एक महापिंड (निहारिका) था।
विकिरण के कारण बाहरी भाग शीतल हुआ, जिससे निहारिका में संकुचन (Contraction) उत्पन्न हुआ।
संकुचन से घूर्णन गति में वृद्धि हुई।
अत्यधिक घूर्णन गति के कारण अपकेन्द्रीय बल के प्रभाव से 1 छल्ला अलग हुआ।
•यह 1 छल्ला बाद में 9 छल्लों में विभाजित हो गया, इन्हीं के शीतलन से ग्रहों का निर्माण हुआ।
कमियाँ- यह सिद्धांत सूर्य के धीमे घूर्णन की व्याख्या नहीं कर पाता।
गैस के ठंडा होकर ठोस पिंड (ग्रह) बनने की प्रक्रिया अवैज्ञानिक है।
B. द्वैतवादी संकल्पना (20वीं शताब्दी)
इस संकल्पना के अनुसार सौरमंडल की उत्पत्ति 2 या उससे अधिक तारों की अंतःक्रिया से हुई है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित परिकल्पनाएं दी गयीं-
1. •चैम्बरलिन व मोल्टन की ग्रहाणु परिकल्पना (Planetesimal Hypothesis) - 1905
ब्रह्मांड में 2 विशाल तारे थे।
जब सूर्य के पास से दूसरा तारा गुजरा, तो •सौर जेट (Solar Jet) उत्पन्न हुई।
इस सौर जेट से सूर्य से अनेक छोटे-छोटे कण (ग्रहाणु) निकले।
इन कणों के आपस में समूहन (Accretion) से ग्रहों का निर्माण हुआ।
2. •जेम्स जीन्स व जेफरीज की ज्वारीय परिकल्पना (Tidal Hypothesis) – 1919 व 1929
जेम्स जीन्स का दृष्टिकोण (1919): जब सूर्य के पास से अन्य विशाल तारा गुजरा, तो सूर्य का कुछ भाग ज्वारीय उद्भेदन (Tidal Friction) के कारण •फिलामेंट (तंतु) के रूप में खिंच गया। यह फिलामेंट बाद में टूटकर सूर्य का चक्कर लगाने लगा, जिससे ग्रह बने।
जेफरीज का संशोधन (1929): प्रारंभ में 2 तारों के अतिरिक्त एक अन्य तारा (सूर्य का साथी तारा) भी था।
पास आता हुआ विशाल तारा सूर्य के साथी तारे से टकराकर बिखर गया।
•टक्कर से उत्पन्न तत्वों से ग्रहों एवं उपग्रहों का निर्माण हुआ।
महत्व: इस परिकल्पना से ग्रहों व उपग्रहों के विकास क्रम, आकार व संरचना की व्याख्या होती है।
कमियाँ: तारों के मध्य परस्पर टक्कर की संभावनाएँ बहुत कम हैं। विशाल तारे का अस्तित्व एवं सूर्य-ग्रहों के बीच वास्तविक दूरी के तथ्य सत्य प्रमाणित नहीं होते।
3. •रसेल की द्वैतारक परिकल्पना (Binary Star Hypothesis) -
यह ज्वारीय परिकल्पना का ही संशोधन है। पास आते हुए विशाल तारे के कारण अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण बल उत्पन्न हुआ, •जिससे सूर्य के साथी तारे से कुछ पदार्थ बाहर निकल गये, इन्हीं से ग्रहों का निर्माण हुआ।
4. •होयल व लिटलिटन की नवतारा परिकल्पना (Nova Hypothesis) -1939
यह भी ज्वारीय परिकल्पना का ही संशोधन है-
•पास आते हुए तारे के कारण सूर्य के साथी तारे में 'नोवा' (Nova) विस्फोट हुआ।
इस विस्फोट से बिखरे धूलकणों व गैसों से ग्रहों का निर्माण हुआ।
5. •ऑटो श्मिड की अंतर-तारक धूल परिकल्पना (Inter-Stellar Dust Hypothesis) - 1943
जब सूर्य आकाशगंगा के निकट से गुजर रहा था, तो इसके आकर्षण बल के कारण धूलकण व गैसें आकर्षित होकर इसकी परिक्रमा करने लगीं, जो घनीभूत होकर चपटी तस्तरी (Disk) के रूप में बदल गयीं और ग्रह बने।
C. आधुनिक सिद्धांत (वर्तमान में सर्वमान्य)
बिग बैंग सिद्धांत (Big-Bang Theory)
•बिग बैंग सिद्धांत का प्रतिपादन जॉर्ज लैमेत्रे ने 1927 में ब्रह्मांड, आकाशगंगा एवं सौरमंडल की उत्पत्ति के लिए किया गया था। इसे विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना (Expanding Universe Hypothesis) भी कहा जाता है। इस सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या रॉबर्ट वेगनर (1967) ने की।
बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले संपूर्ण ब्रह्मांड का पदार्थ एक अत्यंत छोटे, घने और गर्म बिंदु (Singularity) में केंद्रित था। इस बिंदु में एक विशाल विस्फोट हुआ और ब्रह्मांड का विस्तार शुरू हुआ, जो आज भी जारी है।
साक्ष्य:
•एडविन हब्बल का नियम: आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं (Red Shift), जिससे विस्तार की पुष्टि होती है।
ब्रह्मांडीय सूक्ष्मतरंग पृष्ठभूमि विकिरण (CMBR): यह बिग बैंग का बचा हुआ ताप है, जो इस सिद्धांत का मजबूत प्रमाण है।


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